TRISHANKU

Saturday, November 8, 2014

Sayari

"
नसीब में जिसके जो लिखा था,
वो तेरी महफ़िल में काम आया
किसी के हिस्से में प्यास आई,
किसी के हिस्से में जाम आया
मैं एक फसाना हू बेकसी का,
ये हाल हैं मेरी जिंदगी का
ना हुस्न ही मुझ को रास आया,
ना इश्क ही मेरे काम आया
बदल गयी तेरी मंज़िलें भी,
बिछड गया मैं भी कारवाँ से
तेरी मोहब्बत के रास्ते में,
न जाने ये क्या मकाम आया
तुझे भूलाने की कोशिशें भी,
तमाम नाकाम हो गयी हैं
किसी ने ज़िक्र-ए-वफ़ा किया जब ज़ुबान पे तेरा ही नाम आया


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