TRISHANKU

Sunday, March 22, 2015

Khud ko jala raha hu me

आज फिर सिगरेट जला रहा हू मैं,
फिर एक तीली भुझा रहा हू मैं,

उसकी नजर मे तो गुनाह है ये
पर वादे उसके भुला रहा हू मै,

समझना मत उसको आदत मेरी
बस युही धुआं ऊडा रहा हू मैं,

आगर तुमको भी गम तो पास आओ मेरे
पी रहा हू और पिला रहा हू मैं,

मेरी आखे तो आज नम है
फिर भी सबको हसां रहा हू मैं,

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एक सिगरेट पीने के बहाने आज खुद को जला रहा हू मैं
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