आज फिर सिगरेट जला रहा हू मैं,
फिर एक तीली भुझा रहा हू मैं,
उसकी नजर मे तो गुनाह है ये
पर वादे उसके भुला रहा हू मै,
समझना मत उसको आदत मेरी
बस युही धुआं ऊडा रहा हू मैं,
आगर तुमको भी गम तो पास आओ मेरे
पी रहा हू और पिला रहा हू मैं,
मेरी आखे तो आज नम है
फिर भी सबको हसां रहा हू मैं,
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एक सिगरेट पीने के बहाने आज खुद को जला रहा हू मैं
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