TRISHANKU

Sunday, December 7, 2014

Poetry by someone

किस हद तक जाना है ये कौन जानता है, किस मंजिल को पाना है ये कौन जानता है, दोस्ती के दो पल जी भर के जी लो, किस रोज़ बिछड जाना है ये कौन जानता है. तुझे देखे बिना तेरी तस्वीर बना दूं , तुझे मिले बिना तेरा हाल बता दूं , है मेरी दोस्ती में इतना दम , कि तेरी आँख का आंसू अपनी आँख से गिरा दूं ..
ज़िंदगी कि असली उड़ान बाकी है , जिंदगी के कई इम्तेहान अभी बाकी है , अभीv तो नापी है मुट्ठी भर ज़मीन हमने. अभी तो सारा आसमान बाकी है ..


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